शादी के बाद ज़िंदगी अचानक तेज़ हो जाती है।
जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं,
उम्मीदें जुड़ जाती हैं,
और “मैं” धीरे-धीरे “हम” में कहीं खो जाता है।
लेकिन यहीं से एक चुप सा खालीपन शुरू होता है।
हम साथ रहते हैं,
लेकिन बात नहीं करते।
हम दिन भर साथ होते हैं,
लेकिन दिल की बात टालते रहते हैं।
धीरे-धीरे रिश्ते निभाने लगते हैं,
जीने कम लगते हैं।